रिटायर्ड प्रोफेसर की एक मुहिम से गांव हुआ सूखा मुक्त, गांव में खुशी का माहौल

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रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक सोनवाढ ने एक ऐसी रेन हार्वेस्टर मुहिम चलाई जिसकी मदद से असम का एक गांव पिछले 2 साल से सूखा मुक्त हो चुका है. प्राइवेट कॉलेज के प्रोफेसर रहे अशोक साल 2017 में रिटायर हुए थे, उनके जानने वाले लोग बताते हैं कि अशोक अक्सर अलग-अलग जगह लेक्चर देने जाया करते थे और वहां पर वह हमेशा ही विज्ञान से जुड़े लेक्चर दिया करते थे और स्टूडेंट को विज्ञान की महत्वता के बारे में ही ज्यादा बताते थे.

अशोक इस रेन वाटर हार्वेस्टिंग मुहिम के बारे में बताते हैं कि साल 2018 में इस गांव में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई थी और इसकी वजह से कई किसानों ने आत्महत्या कर ली थी. मेरे लिए यह एक बहुत दुख का समय था. अशोक बताते हैं कि साल 2018 में मुझे देशबंडी में एक लेक्चर के लिए बुलाया गया था और बस वहीं से चीजें बदलना प्रारंभ हो गई.

“लेक्चर के बाद गाँव के युवाओं से बातचीत शुरू हुई. बातचीत के दौरान ही उन लोगों ने बताया कि गाँव सूखे की समस्या से जूझ रहा है। सभी युवा इस मसले को लेकर काफी चिंतित दिख रहे थे। छात्र मुझसे यह जानना चाहते थे कि जब गाँव में इतना कम पानी आता है तो ऐसी स्थिति में इस सूखे क्षेत्र में जल संरक्षण कैसे किया जाए।” अशोक बताते हैं कि जिस समय है मैंने गांव के युवाओं के साथ मिलकर यहां का सूखा खत्म करने की कोशिश की तो ग्राम पंचायत से अनुमति लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. बहुत समझाने के बाद हमें गांव के आसपास लगभग 32 हेक्टेयर जमीन बड़ी मुश्किल से दी गई थी.

हमने गांव के युवाओं की मदद से फावड़े और औजारों की मदद से काफी दिन तक खुदाई की, अशोक बताते हैं कि उन्हें पहली बार सफलता साल 2018 में ही मिल गई थी. जब 500 मिमी बारिश हुई थी, इस दौरान हमने पानी पर्याप्त मात्रा में जमा कर लिया था. हमारी इस सफलता को देखकर गांव वालों ने अगले साल हमें बिना कहे ही बहुत सारी जमीन दे दी, और देखते ही देखते यह हमारा प्रोजेक्ट सफल होते चला गया। अशोक बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 80000 का खर्चा आया था. हमने उस दौरान 100 हेक्टेयर नालियों की खुदाई की थी जिससे भूजल में काफी वृद्धि देखने को मिली।

अशोक बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने कुछ पैसा अपनी जेब से खर्च किया और कुछ गांव वालों की मदद से हुआ अशोक के अनोखे तरीके की वजह से प्रशासन ने इस गांव को सूखा मुक्त घोषित कर दिया है. जो गांव सालों पहले पानी की मार झेल रहा था अब उस गांव के किसानों में खुशी का माहौल छा गया है. अशोक की इस मुहिम की चारों तरफ तारीफ की जा रही है. गांव के एक निवासी प्रवीण बताते हैं कि कुछ समय पहले यह गांव टैंकरों पर ही निर्भर रहता था और जिस दिन टैंकर नहीं आता था उस दिन गांव वालों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता था. लेकिन रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक सोनवढ की वजह से यह स्थिति बदल चुकी है. अब गांव वाले इस परेशानी का सामना नहीं कर रहे हैं.

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