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साल 1990 में दादी ने शुरू किया था हैंड मेड गुड़िया बनाने का काम, और आज मिलते हैं विदेशों से आर्डर

गुजरात के छोटे से शहर सुरेंद्रनगर की रहने वाली रंजन बेन भट्ट साल 1990 से हैंडमेड गुड़िया बनाने का काम कर रही हैं. रंजन बेन के व्यापार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अभी तक इनको लगभग 18 देशों से ऑर्डर्स मिल चुके हैं. रंजनबेन और उनके बेटे हरिनभाई अपनी पहली कलाश्री फाउंडेशन के तहत हर महीने 500 से अधिक ईको-फ्रेंडली गुड़ियां बनाकर बेच रहे हैं.

महिलाओं को दिया रोज़गार

इसके अलावा ये दोनों लगभग 20 महिलाओं को रोजगार भी दे चुके हैं. साल 1990 में शुरू हुए इस बिजनेस कि आज लाखों लोग तारीफ कर रहे हैं. और छोटे से स्तर से शुरू हुए कलाश्री फाउंडेशन की आज एक अच्छी खासी पहचान मार्केट में बन चुकी है.

रंजन बेन के बेटे बताते हैं कि उनकी मां को कला और सिलाई करने का शौक था. उन्होंने यह काम खाली समय में रहकर सीखा था जिसके बाद हमने मिलकर उनके शौक से कुछ पैसा कमाने का विचार बनाया और गुड़िया बनाने का काम शुरू किया धीरे-धीरे यह काम बढ़ता ही चला गया.

500 प्रकार की इकोफ्रेंडली गुड़िया

आज कलाश्री फाउंडेशन 500 प्रकार की इको फ्रेंडली गुड़िया बनाकर बेच रहे हैं. इन हैंडमेड गुड़ियाओं की खास बात यह है कि यह पूरी तरीके से हैंडमेड होती हैं. इनमें किसी भी तरीके से मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. बता दे, इनके पास श्री कृष्णा की गुड़िया के अलावा,भारतीय पारंपरिक वस्त्र, राज्यों के किसान और भारतीय नृत्य से जुडे 300 से ज़्यादा मॉडल हैं. लगभग 20 लोगों का स्टाफ गुड़िया बनाने के लिए रोजाना 20 घंटे तक काम करते हैं और कोई अगर विशेष प्रकार की गुड़िया बनवाना चाहता है तो भी उसे बना कर दे देते हैं.

प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ़

कलाश्री फाउंडेशन की पॉपुलरटी का अंदाजा आप इस बात से समझ सकते हैं कि यहां नरेंद्र मोदी और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोग भी जा चुके हैं और कलाश्री फाउंडेशन की जमकर तारीफ भी कर चुके हैं. एक लाख से ज्यादा गुड़िया बना चुकी कलाश्री फाउंडेशन अब एक डॉल म्यूजियम बनाने पर काम कर रही है और जल्द ही इसकी शुरुआत हो सकती है. रंजन बेन का कहना है कि वह अपने बेटों के साथ मिलकर परिश्रम कर रही हैं और जल्द ही इस म्यूजियम को शुरू किया जाएगा.

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