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इन किसानों ने लॉकडाउन के दौरान अपनी तकनीक से किया सबको प्रभावित, किया कुछ नई चीजों का अविष्कार

लॉकडाउन के दौरान किसानों ने बहुत सारे नए तकनीकों पर काम किया और कई सारी नई तकनीक देश के सामने पेश की, चाहे वह कोलार के रहने वाले किसानों द्वारा बनाया गया प्याज और टमाटर का अचार हो या राजस्थान के रहने वाले कैलाश चौधरी द्वारा मक्के से बनाया गया दूध, लॉकडाउन के दौरान किसानों ने बहुत सारी मिसाल देश के सामने पेश किए हैं.

राजस्थान के आंवला खेती से जुड़े किसान कैलाश चौधरी ने अपने खेतों पर ही प्रोसेसिंग यूनिट सेट-अप की प्रिक्रिया को तैयार किया है और आंवले के तरह-तरह के उत्पाद बनाकर वह अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. और कई लोगों को रोज़गार भी दे चुके हैं. वहीं, इसमें महिला किसान भी पीछे नहीं है एक महिला किसान नीलम आर्या अपने घर में ही हाथ की चाकी से बाजरा पीसकर लड्डू और बर्फी आदि बनाती हैं और बिक्री करती हैं. ऐसे ही हरियाणा के एक किसान हैं धर्मबीर कंबोज, जो अंतरराष्ट्रीय आविष्कारक के रूप में कार्य कर रहे हैं.

हरियाणा में यमुनानगर के छोटे से गांव दामला से रखने वाले किसान धर्मबीर कंबोज ने सालों पहले मल्टी-पर्पस प्रोसेसिंग मशीन का आविष्कार किया था उनकी इस मशीन से किसी भी फसल जैसे एलोवेरा,आंवला, तुलसी, आम, अमरुद आदि को प्रोसेस कर सकते हैं. आपको अलग-अलग प्रोडक्ट बनाने के लिए अलग-अलग मशीन की ज़रूरत नहीं है. किसी भी चीज़ का जेल , ज्यूस, तेल, शैम्पू, अर्क आदि इस एक मशीन में ही बना सकते हैं. धर्मबीर का यह आईडिया कामयाब हो गया और उन्हें प्रोसेसिंग के बाद उत्पादों के ज्यादा दाम मिले. धीरे-धीरे उन्होंने दूसरी फसलों पर भी हाथ अजमाया जैसे तुलसी, आंवला, चकुंदर, प्याज, लहसुन, जामुन, आम और अमरुद आदि.

मिला था सम्मान

साल 2009 में उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया और इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. उन्होंने हनी बी नेटवर्क की मदद से पूरे भारत और कई विदेश यात्राएं भी की हैं. इस दौरान, उन्होंने दूसरे किसानों को अपना आईडिया समझाया और साथ ही, उनसे भी कुछ न कुछ नया सीखते रहे.

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