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18 साल के लड़के ने बनाई सोलर ई बाइक, धूप से होती है चार्ज

कहा जाता है कि जो होनाहार बच्चे होते हैं उनके बड़े बड़े पर बचपन से ही निकलना शुरू हो जाते हैं. यह कहावत कहीं तक सही बैठती है गुजरात के वडोदरा शहर के रहने वाले नील शाह के ऊपर. नील शाह ने 18 साल की उम्र में एक सोलर साइकिल बनाई है जो कि जरूरत पड़ने पर बाइक भी बन जाती है और खास बात यह है कि यह सोलर साइकिल धूप से चार्ज होती है. साइंस की दुनिया में रुचि रखने वाले नील शाह बताते हैं कि उनको बचपन से ही कुछ नए वैज्ञानिक एक्सपीरियंस करने का बहुत शौक है और वह कुछ ना कुछ नया सीखने का हमेशा ही प्रयास करते रहते हैं.

नील शाह इस साइकिल के बारे में बताते हैं कि मैंने इस साइकिल को बड़े परिश्रम के बाद बनाया है. इस साइकिल से पोलूशन नहीं होता है और खास बात यह है कि इसमें बहुत कम बिजली की खपत होती है. एक वेबसाइट से बात करते हुए नीलकमल बताते हैं कि किसी भी सामान्य ई-स्कूटर को चार्ज करने में इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग होता है जिसे कार्बन उत्सर्जन करके ही बनाया जाता है. लेकिन मेरी यह साइकिल सूरज की रोशनी और पैंडल के जरिए चार्ज होती है. इसमें न पैसे खर्च होते हैं और न किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन होता है. नीलकमल शाह का कहना है कि इस सोलर साइकिल को बनाने के लिए उनको 1 महीने का समय लगा जिसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की है.

विज्ञान से गहरा संबंध रखने वाले नील शाह के माता-पिता बताते हैं कि नील को विज्ञान में बेहद रूचि है और वह हमेशा ही विज्ञान की नई नई किताबें पढ़ता रहता है. हमें बहुत खुशी है कि उसने इतनी कम उम्र में एक सोलर साइकिल बनाई है और हमें उम्मीद है कि इस सरकार भी इस तरह के आविष्कारों को बढ़ावा देगी. बता दें कि इससे सोलर साइकिल को बनाने में मात्र ₹5000 का खर्चा आया है और यह पैसा भी नील शाह ने अपनी ही मेहनत से कमाया था फिर उसके बाद इस अविष्कार में इस पैसे का उपयोग किया.

बचपन से ही कर रहे नई रिसर्च

नील जब चौथी-पांचवी कक्षा में थे, तभी से उन्हें विज्ञान में काफी दिलचस्पी थी. हालांकि उस समय उनकी क्लास में यह विषय पढ़ाया भी नहीं जाता था. इस बारे में बात करते हुए नील बताते हैं, “मैंने बचपन में स्कूल लाइब्रेरी में क्रिएटर नाम की एक किताब पढ़ी थी. उस किताब में अलग-अलग विज्ञान के मॉडल्स बने हुए थे. तभी से मुझे यह जानने की जिज्ञासा हुई कि ये सारी चीजें बनती कैसे हैं? बाद में जब स्कूल में विज्ञान का विषय पढ़ाया गया, तब मुझे लगा कि अच्छा इन सारे अविष्कारों के पीछे विज्ञान है.

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